YADEIN JO JATI NAHI

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some poems really touches heart  this poem is written by  vikash pandey my  old friend  its great

राह देखी थी इस दिन कि कबसे,

आगे के सपने सजा रखे थे ना जाने कबसे…

बडे उतावले थे यहा से जाने को, ज़िन्दगी का अगला पडाव पाने को…

पर ना जाने क्यो.. दिल मे आज कुछ और आता है,

वक्त को रोकने को जी चाहता है.

जिन बातो को लेकर रोते थे, आज उन पर हसी आति है…

ना जाने क्यो आज उन पलो कि याद बहोत आती है…

कहा करता था… बडी मुश्किल से चार साल सह गया,

पर आज क्यो लगता है कि कुछ पीछे रह गया…

कहि-अनकहि हजारो बाते रह गई,

ना भूलने वाली कुछ यादे रह गई…

मेरी टान्ग अब कौन खीचा करेगा,

सिर्फ़ मेरा सिर खाने कौन मेरा पीछा करेगा…

जहा २००० का हिसाब नहि वहा २ रुपीये के लिये कौन लडेगा,

कौन रात भर साथ जग कर पढेगा…

कौन मेरी गाडि मुजसे पूछे बिना ले जायेगा,

कौन मेरे नये नये नाम बनायेगा…

मै अब बिना मतलब किस से लडूगा,

बिना topic के किस से फ़ालतु बात करूगा…

कौन fail होने पर दिलासा दिलायेगा,

कौन गलति से number आने पर गालिया सुनायेगा…

ऐसे दोस्त कहा मीलेन्गे, जो खाई मे भी धक्का दे आये,

पर फीर तुम्हे बचाने खुद भी कूद जाये…

मेरे गानो से परेशान कौन होगा,

कभी मुजे किसी लडकी से बात करते देख हैरान कौन होगा…

कौन कहेगा साले तेरे जोक पे हसी नहि आई,

कौन पीछे से बूला के कहेगा… “आगे देख भाई…”

movies मै किसके साथ देखूगा,

किसके साथ boring lectures जेलून्गा…

मेरे फ़रजि certificates को रद्दि केहने कि हिम्म्त कौन करेगा,

बिना डरे सच्चि राई देने कि हिम्म्त कौन करेगा…

stage पर अब किस के साथ जाऊगा,

juniors को फ़ालतु के lectures कैसे सुनाऊगा…

अचानक बिन मतलब के कीसी को भि देख कर पागलो कि तरह हसना,

ना जाने ये फ़िर कब होगा केह दो दोस्तो ये दुबारा से सब होगा?

दोस्तो के लिये professor से कब लड पायेन्गे,

क्या हम फिर ये कर पायेन्गे… रात को २ बजे पोहा खाने कौन जायेगा,

तेज गाडि चलाने कि शर्त कौन लगायेगा…

कौन मुजे मेरी काबिलीयत पर भरोसा दिलायेगा,

और ज्यादा हवा मे उड्ने पर ज़मिन पे लायेगा…

मेरि खुशी मे सच मे खुश कौन होगा,

मेरे गम मे मुज से ज्यादा दुखि कौन होगा…

मेरी ये कविता कौन पढेगा, कौन इसे सच मे समजेगा…

बहोत कुच लिख्नना अभि बाकी है, कुछ साथ शायद बाकी है…

बस एक बात से डर लगता है, दोस्तो,

हम अजनबि ना बन जाये दोस्तो…

जिन्दगी के रन्गो मे दोस्ती के रन्ग फ़िके ना पड जाये कहि,

ऐसा ना हो दुसरे रिश्तो कि भिड मे दोस्ती दम तोड जाये…

जिन्दगी मे मिलने कि फ़रियाद करते रेहना,

अगर ना मिल सके तो कम से कम याद करते रेहना…

चाहे जितना हसो आज मुज पर,

मै बूरा नहि मानूगा,

इस हसी को अपने दिल मे बसा लूगा,

और जब याद आयेगी तुम्हारी,

यही हसी लेकर थोडा मुस्कुरा लूगा…

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